संसद ने दी IIM के ऑटोनोमी प्रदान करने वाले विधेयक को मंजूरीTuesday, December 19, 2017-7:32 PM
  • नई दिल्ली/टीम डिजिटल। विभिन्न भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) को सरकारी तंत्र की दखलंदाजी से मुक्त कराने एवं स्वायत्तता के प्रावधान वाले एक अहम विधेयक को आज संसद ने मंजूरी प्रदान कर दी। इसके साथ ही आईआईएम संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व की संस्थाएं घोषित करने का रास्ता साफ हो गया।

    राज्यसभा ने आज भारतीय प्रबंध संस्थान विधेयक 2017 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा से यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। इससे पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस विधेयक के कानून बनने पर आईआईएम को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिल जायेगा। इसके अलावा इन संस्थानों को स्वायत्तता भी मिल सकेगी जिससे छात्रों को डिप्लोमा की जगह डिग्री दे सकेंगे।

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    जावड़ेकर ने कहा कि डिग्री मिलने का सीधा लाभ उन छात्रों को मिलेगा जो अन्य देशों में प्रबंधन के क्षेत्र में शोध कार्य (पीएचडी) करने के इच्छुक होते हैं। मौजूदा व्यवस्था में डिप्लोमा धारक होने के कारण ऐसे छात्रों को तमाम अग्रणी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में पीएचडी में दाखिला नहीं मिलता है। इसके लिये डिग्री की दरकार होती है।

    मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। जावडेकर ने कहा कि फीस को लेकर सदस्यों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। कोई भी गरीब छात्र दाखिले से वंचित नहीं होगा। छात्रों के लिए फीस कोई मुद्दा नहीं होगी और छात्रों को ब्याज मुक्त रिण मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक नयी शुरूआत है और इससे न संस्थानों को डिग्री देने का अधिकार मिल सकेगा। उन्होंने हालांकि कहा कि स्वायत्तता रैकिंग के आधार पर होगी। उन्होंने जोर दिया कि अच्छे संस्थानों को आजादी होनी चाहिए।           

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    कई संस्थानों के मौजूदा बोर्डों के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे बने रहेंगे और उन्हें नए विधेयक के प्रावधानों के अनुसार बनाया जाएगा। इससे पूर्व  विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुये कांग्रेस के एम पी राजीव गौड़ा ने आईआईएम को राष्ट्रीय महत्व के स्वायत्त संस्थान का दर्जा देने की पहल को स्वागतयोग्य बताया। गौड़ा ने कहा कि इससे आईआईएम की कार्यसंस्कृति भी प्रगतिशील बनेगी और इन संस्थानों में निदेशक एवं अन्य पदों पर नियुक्ति से लेकर संचालन प्रक्रिया तक में सरकारी दखल खत्म होगा।

    नयी व्यवस्था के तहत अब आईआईएम परिषद के पदेन अध्यक्ष अब मानव संसाधन मंत्री नहीं होंगे और परिषद में सरकार द्वारा नामित चार सदस्यों की नियुक्ति की परंपरा भी खत्म हो जायेगी। हालांकि गौड़ा ने सरकार से आईआईएम में नियुक्ति एवं शुल्क निर्धारण संबंधी स्वायत्तता मिल जाने के बाद परिषद की मनमानी के खतरे से आगाह करते हुये इससे निपटने के इंतजाम सुनिश्चत करने का सुझाव दिया। इसके अलावा उन्होंने संस्थान में सामाजिक, आर्थिक और लैंगिक समानता को बरकरार रखने के उपाय भी करने का अनुरोध किया।         

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    चर्चा में भाजपा के वी पी सहस्रबुद्धे, सपा के नरेश अग्रवाल, अन्नाद्रमुक के एन गोकुल कृष्णन, तृणमूल कांग्रेस के नदीमुल हक, जदयू की कहकशां परवीन, बीजद के प्रसन्न आचार्य, माकपा के के सोमाप्रसाद, वाईएसआर के विजयसाई रेड्डी, भाकपा के डी राजा, कांग्रेस के जयराम रमेश और शिवसेना के अनिल देसाई  ने भी भाग लिया।

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