सफरनामा 2018: पूरे साल अपने इन फैसलों को लेकर विवादों में रही योगी सरकारFriday, December 28, 2018-5:16 PM
  • नई दिल्ली/आयुषी त्यागी।  योगी आदित्यनाथ ने जब से उत्तर प्रदेश की कमान अपने हाथों में ली है तबसे अपने फैसलों को लेकर वो सुर्खियों में है। 2017 में भी योगी सरकार ने कई ऐसे फैसला लिए जिनसे ना सिर्फ विवाद पैदा हुआ बल्कि सरकार की खूब आलोचना भी हुई। चलिए नजर डालते है इस साल के कुछ ऐसी ही फैसलों पर...

    अयोध्या में राम मूर्ति को लेकर विवाद 

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले महीने ऐलान किया है कि वो अयोध्या में भागवान राम की भव्य 221 मीटर की मूर्ति बनवाएंगे। उन्होंने कहा कि ये मूर्ति गुजरात के मूर्ति गुजरात के सरदार सरोवर में लगाई गई सरदार पटेल की मूर्ति स्टेच्यू ऑफ यूनिटी से भी ऊंची होगी। सीएम योगी के इस फैसले का साधुओं ने कड़ा विरोध जताया उन्होंने कहा कि भगवान राम और सरदार पटेल के बीच होड़ कतई उचित नहीं है।

     स्वामी अविमुत्तेश्वर सरस्वती ने कहा था कि भगवान राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति भगवान राम का अपमान है। उन्होंने कहा था कि पक्षी और जीवजंतु खुले में लगी मूर्ति के आसपास घूमेंगे, जिससे इसपर गंदगी फैलेगी। लिहाजा भगवान की मूर्ति को सिर्फ मंदिर में रखा जा सकता है।

    मुगलसराय स्टेशन के नाम को लेकर विरोध

    इस साल योगी सरकार ने राज्यों के कई शहर और स्थानों के नाम बदले है या फिर बदलने का ऐलान किया है। इश सिलसिला की शुरुआत हुई थी मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलने से।  योगी सरकार ने जून में इस स्टेशन का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव के सार्वजनिक होने के बाद से ही योगी सरकार को विपक्ष का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। सरकार के इस फैसले का समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने राज्यसभा में विरोध किया था।

    साथ ही सरकार को कांग्रेस के भी कड़ा विरोध झेलना पड़ा लेकिन तमाम विरोध के बाद भी स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन कर दिया गया है। 

    इलाहाबाद बना प्रयागराज

    सरकार के इसके बाद अक्टूबर में इलाहबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने का फैसला किया था और कैबिनेट की बैठक के बाद शहर का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया।  बता दें कि कांग्रेस ने इहालाबाद का नाम बदलने का विरोध किया है। स्थानीय लोग और संत समुदाय लंबे समय से इस शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने की मांग कर रहा था। वहीं कांग्रेस ने भी योगी सरकार के इस पहल का विरोध किया है।

    कांग्रेस ने कहा कि शहर का नाम बदले जाने से शहर का इतिहास प्रभावित होगा क्योंकि आजादी की लड़ाई के समय से इस शहर ने अहम भूमिका निभाई है। 

    आरक्षण को लेकर विवाद 

    उत्तरप्रदेश पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट की रिपोर्ट आई। बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद इस कमेटी का गठन किया था। ओबीसी के आरक्षण में पिछड़ों का हिस्सा बांटने की मांग को लेकर बीजेपी के ही मंत्री ओमप्रकाश राजभर लगातार हमलावर दिखते हैं। इस मुद्दे को वे बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भी सामने उठा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में लगभग 234 पिछड़ी जातियां हैं, जिन्हें तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की गई है।

     पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा। पिछड़े वर्ग में सबसे कम जातियों को रखने की सिफारिश की गई है, जिसमें यादव, कुर्मी जैसी संपन्न जातियां हैं। अति पिछड़े में वे जातियां हैं जो कृषक या दस्तकार हैं और सर्वाधिक पिछड़े में उन जातियों को ऱखा गया है, जो पूर्णरुपेण भूमिहीन,गैरदस्तकार, अकुशल श्रमिक हैं। इसमें 60 जातियों को चिन्हित किया गया है। इस तरह से विश्लेषण कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है। अब इस रिपोर्ट को लेकर बीजेपी के सहयोगी दल से मंत्री ओमप्रकाश राजभर सबसे ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे हैं और लागू कराने की मांग कर रहे हैं. राजभर ने कहा कि इसे सरकार को जल्द से जल्द लागू करना चाहिए।

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