International Tiger Day: अकेले भारत में हैं सबसे ज्यादा टाइगर, जाने खास बातेंSaturday, July 29, 2017-3:56 PM
  • Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। आज विश्व बाघ दिवस है। बाघों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक दिन बाघों के नाम मनाया जाता है। बता दें कि पूरे विश्व में बाघों की तेजी से घटती आबादी के प्रति संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने को लेकर हर साल 29 जुलाई को ‘वर्ल्ड टाइगर डे’ मनाया जाता है। इस दिन दुनियाभर में बाघों के संरक्षण से जुड़ी जानकारियों को साझा किया जाता है और इस दिशा में जागरुकता अभियान चलाया जाता है।

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    जानें कब से शुरू हुई ‘वर्ल्ड टाइगर डे’

    वर्ष 2010 से ‘वर्ल्ड टाइगर डे’ की शुरूआत की गई थी। साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में बाघ सम्मेलन में बाघों के सरंक्षण के लिए हर साल ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ मनाने का फैसला लिया गया। तब से हर साल विश्वभर में वर्ल्ड टाइगर डे मनाया जाता है। इस सम्मेलन में 13 देशों ने भाग लिया था और उन्होंने 2022 तक बाघों की संख्या में दोगुनी बढ़ोत्तरी का लक्ष्य रखा था।

    भारत में 3891 बाघ 

    जंगलों के कटान और अवैध शिकार के कारण बाघों की संख्या तेज़ी से कम हो रही है। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड और ग्लोबल टाइगर फोरम के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक, पूरी दुनिया में लगभग 6000 बाघ ही बचे हैं जिनमें से 3891 बाघ भारत में हैं। 

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    दुनिया में पाई जाने वाली बाघों की प्रजातियां

    पूरी दुनिया में बाघों की कई तरह की प्रजातियां मिलती हैं। इनमें 6 प्रजातियां मुख्य हैं। इनमें साइबेरियन बाघ, बंगाल बाघ, इंडोचाइनीज बाघ, मलायन बाघ, सुमात्रा बाघ और साउथ चाइना बाघ शामिल हैं। 

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    बंगाल टाइगर
    बंगाल टाइगर, या पेंथेरा टिगरिस, प्रकृति की सबसे अद्भुत रचनाओं में से एक है। यह बाघ परिवार की एक उप-प्रजाति है और भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं दक्षिण तिब्बत के क्षेत्रों में पाई जाती है। इसके शौर्य, सुंदरता और बलशाली रूप को देखते हुए बंगाल टाइगर को राष्ट्रीय पशु के सम्मान से नवाज़ा गया है।  

    मांस खाने वाले स्तनधारी जीवों में बाघ के कैनाइन दांत सबसे लम्बे होते हैं। यह दांत 4 इंच तक बढ़ सकते हैं जो बब्बर शेर के कैनाइन दांतों से भी बड़े हैं। इन शक्तिशाली जीवों के पास अंदर से बाहर जाने वाले पंजे भी होतें हैं, जो उन्हें चढ़ाई करने में सहायता करते हैं। अन्य जीवों की अपेक्षा बाघों की देखने और सुनने की शक्ति कहीं ज्यादा होती है।

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    इंडोचाइनीज टाइगर
    इंडोचाइनीज टाइगर बाघ की यह प्रजाति कंबोडिया, चीन, बर्मा, थाईलैंड और वियतनाम में पाई जाती है। इस प्रजाति के बाघ पहाड़ों पर ही रहते हैं। 

    मलयन टाइगर

    मलयन टाइगर यह प्रजाति मलय प्रायद्वीप में पाई जाती है।

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    साइबेरिया टाइगर
    साइबेरिया के सुदूर पूर्वी इलाके अमर-उसर के जंगलों में पाई जाने वाली बाघ की प्रजाति होती है। यह उत्तर कोरिया की सीमा के पास उत्तर-पूर्वी चीन में हुंचुन नेशनल साइबेरियाई टाइगर नेचर रिजर्व में कुछ संख्या में हैं और इनकी कुछ संख्या रूस के सुदूर पूर्व में भी पाई जाती है। 

    साउथ चाइना टाइगर

    साउथ चाइना टाइगर इस प्रजाति के नर बाघों की लंबाई 230 से 260 सेंटीमीटर और वजन लगभग 130 से 180 किलोग्राम होता है। वहीं, मादा बाघ की लंबाई 220 से 240 सेंटीमीटर और वजन लगभग 100 से 110 किलोग्राम होता है।

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    सुमत्रन टाइगर
    ये बाघ सिर्फ सुमात्रा आइसलैंड में पाए जाते हैं। 1998 में इसे एक विशिष्ट उप- प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। यह प्रजाति भी भारत की लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल है।

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