सफरनामा 2018: राम मंदिर से लेकर राफेल तक इन मुद्दों पर घिरी रही सरकारMonday, December 31, 2018-11:22 AM
  • नई दिल्ली/अमरदीप शर्मा। साल 2018 विदा हो रहा है। सभी अपने- अपने खास अंदाज में इसे विदाई दे रहे हैं। भारतीय राजनीति के लिहाज से ये साल कई मायनों में खास रहा। भारत सरकार के लिए कई ऐसे मुद्दे सामने आए जोकि सरकार के लिए मुसीबत बने रहे। हालांकि कई फैसलों के लिए सरकार की सराहना हुई है तो कई फैसले ऐसे रहे जिनके लिए सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा है। 

    राम मंदिर को लेकर इस साल राजनीति जोरों पर रही। इसके अलावा किसानों का प्रदर्शन, राफेल डील को लेकर सरकार पर विपक्ष का निशाना, इसके अलावा आरबीआई और सीबीआई का मामला भी चर्चा का विषय रहा है। चलिए तो हम आपको ऐसे ही कुछ मुद्दों से अवगत कराते हैं जिन्हें लेकर पूरी साल सरकार निशाने पर रही। 

    अयोध्या राम मंदिर

    काफी लंबे समय से लंबित चला आ रहा अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा इस साल काफी चर्चा में रहा। सरकार पर राम भक्त मंदिर बनाने के लिए रास्ता निकलवाने का दवाब डालते रहे। संत समाज भी सरकार को चेतावनी देता रहा। इसके अलावा भारत सरकार के अपनी ही सरकार के मंत्री, सांसद, नेता विधायक भी सरकार की आलोचना करते रहे। इस साल कोर्ट में भी राम मंदिर को लेकर सुनवाई होनी थी हालांकि नवनिर्वाचित मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि ये मुद्दा हमारी प्राथमिकता में नहीं है और इस पर सुनवाई टाल दी गई। इसके बाद राममंदिर के समर्थकों का गुस्सा बढ़ गया। इसके बाद संत समाज और राममंदिर के समर्थक सरकार से संसद भवन में अध्यादेश लाकर मंदिर का रास्ता निकलवाने के लिए  सरकार पर जोर डाला गया। इसके अलावा कई लोगों ने धमकी भी दी है कि अगर सरकार राम मंदिर नहीं बनवा पाती है तो वे 2019 में अगली सरकार चुन लेंगे। 

    किसानों का प्रदर्शन

    इस साल सरकार के ऊपर किसानों का भी गुस्सा जमकर बरसा। देश भर के लगभग दो सौ किसान संगठन अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों को कृषि कर्ज से मुक्ति दिलाने संबंधी कानून पारित कराने की मांग को लेकर दिल्ली में संसद मार्च किया। 29 नवंबर को किसान संगठनों के प्रतिनिधि दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्र हुए। किसान संगठनों की मुख्य मांग कृषि क्षेत्र को विभिन्न समस्याओं से उबारने के लिए संसद से किसान मुक्ति विधेयक पारित कराना है। किसान संगठनों द्वारा तैयार किए गए दो विधेयकों के प्रारूप को कानून के रूप में पारित कराना है। इनमें पहला विधेयक किसानों की कर्ज से मुक्ति से संबंधित है और दूसरा कृषि उत्पादों का किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मुहैया कराने का अधिकार सुनिश्चित करने से संबंधित है। किसानों की मांग है कि इन विधेयकों को कानून का दर्जा देने पर ही किसानों को कृषि ऋण से निजात दिलाया जा सकेगा।


     राफेल डील में घोटाले का आरोप

    कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकतंत्र के मंदिर यानि संसद भवन में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान होने वाली बहस में भरी लोकसभा में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। राहुल गांधी ने कहा था कि फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान राफेल को लेकर हुई डील में बड़ा घोटाला हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था। मामला इतने पर शांत नहीं हुआ राहुल के बयान के बाद पूरा विपक्ष एकजुट होकर सरकार पर निशाना साधता रहा। चुनावी गलियारों में भी राफेल का शोर गूंजने लगा। राहुल गांधी हरेक सभा में राफेल का नाम लेना नहीं भूल रहे थे।इतना ही नहीं राहुल गांधी ने पीएम को सीधे चोर कहकर संबोधित कर दिया। राहुल ने कहा, गली-गली में शोर है देश का चौकीदार चोर है।

    इसके बाद मामला सीधा देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंचा। कोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़ी जानकारी हमें मुहैया कराएं जिसके बाद फैसला किया जाएगा कि आखिर मामले में कितनी सच्चाई है। इस पर 14 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। इसके साथ ही कहा कि लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश इन विमानों के बगैर नहीं रह सकता है।

     

    आरबीआई 

    हाल ही में आरबीआई और सरकार के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं। जिसके बाद आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद सरकार पर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने सरकार के साथ मतभेद होने के चलते अपने पद से इस्तीफा दिया है। हालांकि उन्होंने कहा था कि वे अपने निजी कामों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। 

    खबर थी कि आरबीआई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र आरबीआई एक्ट 1934 के सेक्शन 7 तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करने जा रही है। इसके मुताबिक सरकार के पास अधिकार होता है कि वह जनता के हित को ध्यान में रखते हुए आरबीआई को दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। गवर्नर की शक्तियां केंद्रीय निदेशक मंडल के पास आ जाती हैं। आरबीआई ने 11 सरकारी बैंकों को पीसीए (प्रॉम्प्ट करैक्टिव एक्शन) में डाल रखा है। रिजर्व बैंक को लगता है कि कोई बैंक मुनाफा नहीं कमा रहा और उसका फसा कर्ज बढ़ रहा है तो उसे पीसीए में डाल देता है। सरकार चाहती थी कि रिजर्व बैंक 11 बैंकों को पीसीए से निकाल दे।
      
    गौरतलब है कि 26 अक्तूबर, 2018 को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि अगर सरकार केंद्रीय बैंक की आजादी का सम्मान नहीं करेगी तो उसे जल्दी या बाद में आर्थिक बाजारों की नाराजगी का शिकार होना पड़ेगा। डिप्टी गवर्नर के बाद मीडिया में यह खबर भी आई कि केंद्र सरकार की बढ़ती दखलंदाजी के कारण आरबीआई गवर्नर  इस्तीफा दे सकते हैं। हुआ भी ऐसा ही कुछ दिनों बाद ही उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद सरकार की आलोचना हुई।

     सीबीआई

    बड़े से बड़े मामले को सुलझाने वाली देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में इन दिनों  महासंग्राम छिड़ा हुआ है। ये संग्राम भी ऐसा है कि पहले तो सीबीआई ने खुद के ही दफ्तर पर छापा मारा इसके बाद एक-एक कर अधिकारियों को गिरफ्तार करना शुरू किया। 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई। उनके ऊपर आरोप लगा कि उन्होंने एक कारोबारी से दो करोड़ रुपए की रिश्वत ली।

    दरअसल मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले के तहत जांच के दायरे में थे। ये पैसे इसलिए दिए गए ताकि जांच को प्रभावित किया जाए। इस मामले की अगुवाई अस्थाना को दो करोड़ रुपये की रकम देने की।  ये एफआईआर सीबीआई ने बिचौलिया मनोज की गिरफ्तारी के बाद दर्ज की थी। मनोज ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान में अस्थाना को दो करोड़ रुपये की रकम देने की बात कही थी। गुजरात का बहुचर्चित गोधरा कांड तो याद होगा आपको उस दौरान गोधरा कांड की जांच के लिए गठित हुई स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) का राकेश अस्थाना ने ही नेतृत्व किया था। इसी दौरान  कारसेवकों से भरी ट्रेन को सुनियोजित तरीके से आग के हवाले किया गया था। इस दौरान अस्थाना पर बीजेपी सरकार के इशारे पर काम करने के आरोप लगते रहे।

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