अपनी मांगों को लेकर गांव - गांव घूमेंगे किसान, गुजरात से होगी शुरूआतWednesday, November 22, 2017-10:48 AM
  • नई दिल्ली/ब्यूरो। किसान मुक्ति संसद के दूसरे व आखिरी दिन कर्ज मुक्ति और फसल मूल्य डेढ़ गुणा की मांग को लेकर आक्रोशित किसान नेताओं ने राज्य व जिलों में आंदोलन करने की बात कही है। मंच पर किसान एकता जिंदाबाद के नारे के साथ किसानों ने भाजपा/आरएसएस को भी उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।

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    संसद मार्ग पर किसान मुक्ति संसद के दूसरे दिन स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने मोदी सरकार की किसान  नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों ने किसानों को गर्त में धकेल दिया। बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने एक विवादित बयान का हवाला देते हुए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ  उंगली उठाने वालों की वो उंगली उखाड़ लेंगे और हाथ काट लेंगे। 

    इस दौरान हजारों किसानों ने उंगलियां उठाकर मोदी की नीतियों के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध जताया। कर्ज के बोझ तले आत्महत्या करनेवाले किसानों की विधवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश आपके साथ खड़ा है और हम सरकार की नीतियों के खिलाफ इस लड़ाई को मिलकर लड़ेंगे।

    अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के भविष्य के कार्यकाल पर योगेंद्र यादव ने अपने भाषण में कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक अभियान शुरू किया जाएगा कि निर्धारित एमएसपी के नीचे कोई फसल नहीं बेची जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए एक देशव्यापी अभियान 26 नवम्बर को उस दिन शुरू होगा जिस दिन देश के संविधान को अंतिम रूप दिया गया था और यह अभियान का समापन 26 जनवरी को उस दिन होगा जब हमारे संविधान को मंजूरी दी गई थी।

    समिति के संयोजक वीएम.सिंह ने सरकार को चेतावनी दी की कहीं ऐसा न हो कि देश भर के नाराज किसान संसद मार्ग की जगह संसद पर कब्जा कर लें। देश में भले ही अलग-अलग राज्य व भाषा हो लेकिन किसानों की पीड़ा एक समान है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को फसलों के लागत मूल्य मिला होता तो वे आत्महत्या नहीं करते। कार्यक्रम का समापन नर्मदा बचाओ आंदोलन की जनक मेधा पाटकर ने किसानों को संकल्प दिलाकर और राष्ट्रगान भी किया। 

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    पूरे देश में चलेगा आंदोलन : अतुल अंजान
     
    अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव व सीपीआई नेता अतुल अंजान ने कहा कि कर्ज माफी और फसल की कीमत डेढ़ गुना की जाने की मांग पूरी नहीं होने पर देश के सभी राज्यों व जिलों में सरकार की घेराबंदी कर आंदोलन चलाया जाएगा। दो दिन तक चले किसान मुक्ति संसद में देश भर के हजारों किसानों के जुटने के बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि मिलने तक नहीं आया। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल का बीमा कराकर सरकार ने बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाया। किसान मुक्ति को लेकर देशव्यापी अभियान 26 नवम्बर से गुजरात के बारदोली से करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यहीं से सरकार पटेल ने भी आंदोलन शुरू किया था। किसानों के मामले में योगी सरकार को भी ढोंगी सरकार करार दिया। 

    अब आगे क्या करेंगे

    समिति के संयोजक वीएम. सिंह ने कहा कि कर्ज मुक्ति और फसल की कीमत डेढ़ गुणा की मांग को लेकर किसान मुक्ति संसद में पेश किए गए बिल को पास कराने को लेकर देश भर के गांवों में जाकर किसानों से सुझाव लिया जाएगा। इसके लिए अखिल भारतीय किसान सभा के महामंत्री व पूर्व सांसद हन्नान मौला और सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में एक कमेटी बनेगी। इस बिल पर किसानों की राय ली जाएगी और कमेटी को भेजी जाएगी। इन सुझावों को वर्किंग कमेटी पास करेगी। उन्होंने किसानों से कहा कि जात बिरादरी को छोड़कर किसान बिरादरी की तरफ लौटे।

    बिल पास कराने के लिए सैकड़ों जगहों पर किसान मुक्ति चर्चा का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने किसानों से आत्महत्या नहीं करने की अपील भी की। कार्यक्रम का समापन नर्मदा बचाओ आंदोलन की जनक मेधा पाटकर ने किसानों को संकल्प दिलाया और राष्ट्रगान भी किया। 

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    मुहिम की शुरुआत गुजरात से

    26 नवम्बर से 26 दिसम्बर तक किसान मुक्ति की शुरुआत गुजरात के बारदोली से होगी। इसके लिए एक देशव्यापी अभियान 26 नवंबर को उस दिन शुरू होगा जिस दिन देश के संविधान को अंतिम रूप दिया गया था और यह अभियान का समापन 26 जनवरी को उस दिन होगा जब हमारे संविधान को मंजूरी दी गई थी। 

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